बुद्धिर्बलं यशो धैर्यं निर्भयत्वमरोगता। अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनुमत्स्मरणाद् भवेत्॥
buddhir balaṁ yaśo dhairyaṁ nirbhayatvam arogatā | ajāḍyaṁ vāk-paṭutvaṁ ca hanumat-smaraṇād bhavet ||
श्रीहनुमान जी के स्मरण और आदर्शों पर चलने से बुद्धि, शारीरिक व आत्मिक बल, उज्ज्वल यश, अचल धैर्य, निर्भयता, उत्तम स्वास्थ्य, कर्मठता (आलस्य का अभाव) और प्रभावी वाक्पटुता प्राप्त होती है।